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आज का संदर्भ

बंगाल चुनाव : ममता बनर्जी

Date: 06-May-2026

करीब एक साल पूर्व तलाश के बूंदे-4 पृष्ठ-24 लिखा गया था ममता बनर्जी स्वघोषित चुनाव परिणाम लेकर अपने गैंग के साथ कलकत्ता या फिर दिल्ली में बैठ जायेगी तो कोई क्या कर लेगा यह चरितार्थ हो रहा है |

बूंदे-4 का पृष्ठ-37 भी संदर्मित है |

ममता बनर्जी इस देश के ‘लोकतंत्र’ के लिये सही है क्योंकि कमजोर केंद्र देश को चरित्र देने में सक्षम नहीं है|

  • आर० जी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डाक्टर का रेप एवं हत्या के बाद प्रशासन द्वारा साक्ष्य मिटाना , दोषियों को संरक्षा प्रदान करना ..........
  • ई० डी० द्वारा कारवाई के दौरान किसी मुख्य मंत्री का प्रशासन/पुलिश के साथ घुसकर सम्बंधित फ़ाइल छीन लेना |
  • संसद में पास कानून UCC हो या CAA नहीं मानेंगे भारत एक देश नहीं है, संघ है ममता जी की मान्यता ही विधान है, संविधान है |
  • संदेश खाली घटना को अंजाम देने वाले का आजतक संरक्षण, असहायों की चीख का असर नहीं ....
  • पिछले चुनावी जीत के बाद संदिग्ध विरोधियों/हारे हुये लोगों के घर मार काट करना, जला देना, रेप कर यह संदेश देना कि ‘अगले चुनाव के लिये याद रखना’...........
  • (इसके अलावे अन्य कई उदहारण ऐसे है जिसमें से एक भी ममता बनर्जी को कैदखाने के पर्याप्त था )
  • अतः अगली कड़ी तो यही है- ममता बनर्जी की मर्जी है

चुनाव नहीं हारी है-

मुख्यमंत्री है और रहेगी

सही भी है और क्योंकि इस नपुंसक देश/संविधान के रक्षकों का यही हाल है-

कुछ और भी लोग है कुछ और भी जगह है, जहाँ इसकी पुनरावृति होनी है/होगी |

देश के अन्दर बहुतेरे ऐसे है जो सिर्फ इसलिये sadistic है कि कोई प्रधानमंत्री मरता क्यों नहीं, कोई मारता क्यों नहीं है|  

 

तलाश परिवार

डॉ० विश्वेन्द्र कुमार सिन्हा

विश्वास : अंधविश्वास धर्म : धर्मगुरु

Date: 06-May-2026

 

हर धर्म का आधार मुख्यतः विश्वास है |

हर धर्म में (मेरा मानना है) अंधविश्वास भी है |

कौन ज्यादा/कम कहना सम्भव नहीं है, लड़ाई/रक्तपात का मुद्दा हो जायेगा |

विश्वास अंततः अंधविश्वास, एवं अंधभक्ति के रूप में सांस्कारिक इच्छाओं से जुड़ने या/एवं आध्यात्मिक उत्थान की संभावनाओं का लोभ भी गलत प्रथाओं/परम्पराओं का कारण है |

यह अंधविश्वास इस हद तक बढ़ जाता है कि यह अक्सर गैंग का रूप लेकर जर-जमीन के झगड़े के रूप में, सामूहिक अपराध के अन्य रूपों में, सामने आते रहते हैं |

सेक्स स्कैंडल चलते और छुपे रहते हैं |

धार्मिक असहिष्णुता, सामाजिक असहिष्णुता, समाज/देश/राष्ट्र को दोयम दर्जो में रख देता है |

बहुत मामलों में चरणामृत पान, जैसे अन्य (विवरण उचित नहीं हैं) आचरण के रूप में, अमानवीय रूप में परिणत हो जाता है |

इसी कारण भीड़ में भगदड़, जान माल की क्षति तो अक्सर ही होती रहती है |

      इस सबका कारक संरक्षक परिवर्धक धर्मगुरु होते है |

      ये धर्म से ज्यादा समूह संगठन का कार्य करते है |

 

 

तलाश परिवार

डॉ० विश्वेन्द्र कुमार सिन्हा

न्यायालय का अपमान सबका अपमान है।

Date: 05-May-2026

केजरीवाल अपने केस की सुनवाई के लिए पसंदीदा जज चाहते हैं।
सभी लोग ऐसा क्यों नहीं कर सकते!
क्या मजा है! मैंने अपराध किया है? अच्छा तो मेरे ये जज रहेंगे, जैसा ये कहेंगें।
और प्रभावशाली हो जायेगे तो किसी को भी अपने लिए जज बना लेंगे।
"समरथ के नहीं दोष गुसांई”- तुलसीदास का वचन कितना सत्य है- न्यायालय द्वारा सिद्ध एवं घोषित 
प्रशांत भूषण को अवमानना में मान मनोबल कर एक रुपया का ‘दंड’(?); किसी को कारावास, किसी को और सजाएं।
इससे बड़ा किसी जज / न्यायालय का अपमान क्या हो सकता है कि मैं इनके कोर्ट में सुनवाई करवाऊंगा ।
यह तो स्वयं सिद्ध अवमानना है।
हमें पढ़ाया गया कि न्यायालय कमजोरों की सुरक्षा के लिये हैं। इसके सामने राजा, रंक बराबर, सभी नागरिक बराबर, ये पक्षपात और प्रभाव के निषेध के लिये आँखें बंद रखते हैं !
आँखें बंद रखते हैं इसलिए तो काफी कुछ दिखता नहीं।
संबंधित जज साहिबा को या तो त्याग पत्र देना चाहिये या केजरीवाल को सीधे सजा।

तलाश परिवार 
(डॉ० विश्वेन्द्र कुमार सिन्हा )
 

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